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राम मंदिर दान घोटाले में नया मोड़! पत्नी ने खोला बड़ा मोर्चा, बोलीं— 'मेरे पति नहीं, असली गुनहगारों को बचाया जा रहा है'

 


अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान की कथित हेराफेरी का मामला लगातार नया मोड़ लेता जा रहा है। इस प्रकरण में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में शामिल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने अब खुलकर अपने पति का बचाव किया है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पति को इस पूरे मामले में जानबूझकर फंसाया गया है, जबकि असली जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पूनम यादव ने मीडिया के सामने भावुक होकर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा कि उनके पति वर्षों से राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व से जुड़े संगठनों के लिए समर्पित होकर कार्य करते रहे हैं और उन्हें अपराधी की तरह पेश करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

पति को बताया निर्दोष, ट्रस्ट पर लगाए गंभीर आरोप

शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पूनम यादव ने कहा कि उनके पति टिन्नू यादव का पूरा जीवन धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां और संबंधित पक्ष इस पूरे मामले के वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय उनके पति को आसान निशाना बना रहे हैं।

पूनम यादव के अनुसार, उनके पति को इसलिए फंसाया गया क्योंकि वे प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े हुए थे और उनके खिलाफ आरोप लगाना आसान था। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई ऐसे तथ्य सामने आएंगे जो पूरे मामले की दिशा बदल सकते हैं।

राम मंदिर आंदोलन से जुड़ाव का किया दावा

पूनम यादव ने अपने पति के अतीत का उल्लेख करते हुए कहा कि वे वर्ष 1992 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, यादव समुदाय से होने के बावजूद उन्होंने भगवा ध्वज उठाकर मंदिर आंदोलन में भाग लिया और बाद में लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के लिए निष्ठा के साथ कार्य किया।

उन्होंने कहा कि ऐसा व्यक्ति मंदिर के दान में गड़बड़ी करेगा, यह बात उन्हें स्वीकार नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों तक संगठन और मंदिर के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति को आज बिना पूरे सच के सामने आए अपराधी घोषित कर दिया गया है।

50 करोड़ की संपत्ति के आरोपों पर दिया खुला जवाब

मामले में सबसे अधिक चर्चा कथित अवैध संपत्ति को लेकर भी हो रही है। जांच के दौरान टिन्नू यादव और उनके परिवार के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति तथा लग्जरी वाहनों की चर्चा सामने आई है।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूनम यादव ने कहा कि उनके परिवार के पास 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है।

उन्होंने मीडिया के सामने चुनौती देते हुए कहा,

"अगर जांच में हमारे पास 50 करोड़ रुपये की संपत्ति मिलती है तो मैं उसमें से 45 करोड़ रुपये तुरंत राम मंदिर ट्रस्ट को दान कर दूंगी और सिर्फ 5 करोड़ रुपये अपने पास रखूंगी।"

उनका कहना है कि उनके परिवार को बदनाम करने के लिए झूठे आंकड़े प्रचारित किए जा रहे हैं।

पुलिस का क्या कहना है?

दूसरी ओर पुलिस की जांच पूरी तरह अलग तस्वीर पेश कर रही है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि टिन्नू यादव पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर के रूप में कार्यरत थे। बाद में वे मंदिर प्रशासन और वीआईपी प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का हिस्सा बन गए।

पुलिस के अनुसार, टिन्नू यादव के पास उस कमरे की चाबियां थीं जहां मंदिर में प्राप्त दान की राशि की गिनती की जाती थी। जांच में यह आरोप लगाया गया है कि इसी पहुंच का लाभ उठाकर दान की रकम और उसकी गिनती की प्रक्रिया में कथित रूप से बड़े स्तर पर हेरफेर की गई।

हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।

परिवार का दावा— सच को दबाया जा रहा है

टिन्नू यादव के परिवार का कहना है कि पूरे मामले में केवल एक पक्ष की कहानी सामने लाई जा रही है। उनका आरोप है कि वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा और जांच एक तय दिशा में आगे बढ़ाई जा रही है।

परिवार का कहना है कि यदि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए तो कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं जो अभी चर्चा में नहीं हैं।

दान व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल

इस पूरे विवाद ने राम मंदिर में दान की सुरक्षा और उसकी पारदर्शिता को लेकर भी बहस तेज कर दी है। देशभर से प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं और बड़ी संख्या में दान भी करते हैं।

ऐसे में यदि दान की राशि के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से भी जुड़ा विषय बन जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में दान की गिनती, सुरक्षा और लेखा-जोखा पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो सके।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा

मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लगातार बहस चल रही है। एक वर्ग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष परिवार के दावों को गंभीरता से लेने की मांग कर रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और संबंधित आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर टिन्नू यादव का परिवार लगातार यह दावा कर रहा है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है।

आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्य, अदालत में पेश होने वाले दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे। यदि जांच में पुलिस के आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि परिवार के आरोपों में दम पाया जाता है तो जांच की दिशा बदल सकती है।

यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक बयानों और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। पुलिस के आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं। टिन्नू यादव तथा उनके परिवार ने आरोपों से इनकार किया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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